यमुना एक्सप्रेस वे बस हादसा: ‘देवदूत’ बनकर आए निहाल, नाले में आधी डूबी बस से बचाईं जिन्दगियां

हाल ही में हुए यमुना एक्सप्रेस बस हाडे में कई लोगो की मौत हुई है और कई घायल हुए है. लेकिन जब वह हादसा हुआ था तो वहा सबसे पहले निहाल सिंह ही पहुंचे थे. उन्होंने कहा की जब में खेत में शौच के लिए आया था. तो उन्होंने कहा की नाले के पास ही एक झरना भी है. तभी उन्होंने कहा की तेज़ आवाज़ आयी. उन्होंने कहा की उन्हें लगा की कोई ट्रक या बस उसमे घिर गयी है.

उन्होंने कहा की में झरने के तरफ गया फिर देखा की बस पानी में दुब गयी थी और लोगो के चिल्लाने की आवाजे आ रही थी. उन्होंने कहा की बस में से खून भी बहार आने लग रहा था. उन्होंने कहा की मेरे पास मोबाइल भी नहीं था और कुछ समझ ही नहीं आ रहा था क्या करू और क्या नहीं, फिर में नीचे चल गया और एक दो आदमी को बहार निकाला और उनके पास से उनका मोबाइल लेकर मेने 100 नंबर पर कॉल किया और तब तक पुलिस आती उससे पहले उन्होंने लोगो को बचाना शुरू कर दिया था.

वह भागते हुए अपने गांव गए और चिलाने लगे गांव के सभी लोग आ गए और पुलिस भी आ गयी थी लेकिन 2 ही हवालदार आये थे. और नदी से 1 किलोमीटर ही दूर था गांव. गांव वालो के पास जेसीबी थी जो लेकर आ गए थे. गांव वाले सभी नदी में कूद गए और लोगो की जान बचाने लग गए थे. 30 मिनट बाद छलेसर चौकी से और पुलिसवाले आ गए। वे भी हमारे साथ लग गए। हमने घायलों और मृतकों को बाहर निकाला लेकिन तब तक एंबुलेंस नहीं आई थी। पुलिसवालों ने फोन किया, तब जाकर एंबुलेंस आई लेकिन तब तक एक घंटा बीत चुका था। घायलों को अस्पताल ले जाया जाने लगा। तब तक आसपास के गांवों से बहुत लोग आ चुके थे।

मरने वालो के शव को नाले के पास ही रखा गया है. निहाल सिंह ने कहा की मेने मेरे जीवन में पहली बार इतनी लाशें देखि है. उन्होंने कहा की लाशो को देखा जो में जिंदगी भर नहीं भूल पाउँगा. बस के अंदर कई लोग अपने परिवार के साथ थे.

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